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RBI की नई डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता कौन हैं, और क्यों हैं ये खास?

भारतीय रिज़र्व बैंक की नई डिप्टी गवर्नर बनीं पूनम गुप्ता, जो वैश्विक अनुभव और आर्थिक नीतियों में गहरी विशेषज्ञता रखती हैं। उनकी नियुक्ति से आरबीआई की मौद्रिक नीति, वित्तीय स्थिरता और बैंकिंग सुधारों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को अपनी नई डिप्टी गवर्नर के रूप में पूनम गुप्ता मिली हैं। केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। गहरी आर्थिक समझ और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में लंबे अनुभव के साथ, पूनम गुप्ता का यह पदभार ऐसे समय में आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बीच संतुलन साध रही है।

अर्थशास्त्र की दुनिया में प्रतिष्ठित नाम

पूनम गुप्ता का नाम आर्थिक नीतियों और अनुसंधान के क्षेत्र में अत्यंत प्रतिष्ठित है। वह इससे पहले नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की प्रमुख रही हैं, जहां उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण अध्ययनों का नेतृत्व किया। इसके अलावा, वह इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (IFC) में ग्लोबल मैक्रो और मार्केट रिसर्च के लिए प्रमुख अर्थशास्त्री के रूप में कार्य कर चुकी हैं।

विश्व बैंक में एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री के रूप में अपनी भूमिका निभाने के अलावा, उन्होंने इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भी अध्यापन कार्य किया है। पूनम गुप्ता वर्तमान में 16वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद की सदस्य हैं और नीति आयोग की विकास सलाहकार समिति का भी हिस्सा रही हैं। भारत की G-20 अध्यक्षता के दौरान उन्होंने मैक्रोइकॉनॉमिक्स और व्यापार पर टास्क फोर्स का नेतृत्व किया था।

शिक्षा और उपलब्धियां

पूनम गुप्ता की शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें अर्थशास्त्र के क्षेत्र में और अधिक विश्वसनीयता प्रदान करती है। उन्होंने मैरीलैंड विश्वविद्यालय, कॉलेज पार्क से अर्थशास्त्र में पीएच.डी. (1998) की है। उनकी पीएच.डी. रिसर्च को 1998 में एक्जिम बैंक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इससे पहले, उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से एम.ए. (1991) और हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में बी.ए. (1989) किया था।

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आरबीआई में उनकी भूमिका

डिप्टी गवर्नर के रूप में, पूनम गुप्ता भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति, वित्तीय स्थिरता, बैंकिंग विनियमन और अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालेंगी। ऐसे समय में जब भारत को मुद्रास्फीति नियंत्रण, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और डिजिटल मुद्रा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, उनकी विशेषज्ञता से आरबीआई को सही दिशा मिल सकती है।

सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच आर्थिक रणनीतियों को संतुलित करने में उनकी भूमिका अहम होगी। उनकी नियुक्ति से नीति-निर्माण की प्रक्रिया को गहराई और व्यावहारिक दृष्टिकोण मिलेगा, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

एक निर्णायक नियुक्ति

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर पद पर पूनम गुप्ता की नियुक्ति को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उनकी गहरी नीतिगत समझ और वैश्विक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, यह अपेक्षा की जा रही है कि उनके कार्यकाल में भारतीय बैंकिंग प्रणाली में प्रभावी सुधार देखने को मिलेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वह केंद्रीय बैंक की रणनीतियों को किस दिशा में आगे बढ़ाती हैं और किस तरह से आर्थिक सुधारों को अमलीजामा पहनाती हैं।

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