असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़े फर्जी सिम कार्ड रैकेट का खुलासा किया है। इस मिशन को नाम दिया गया है ऑपरेशन घोस्ट सिम। STF प्रमुख डॉ. पार्थ सारथी महंत की अगुवाई में यह कार्रवाई की गई, जिसमें सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
असम के DGP हरीमीत सिंह ने बताया कि इस रैकेट की जानकारी गजराज मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिली थी। इसके बाद STF और स्पेशल ब्रांच ने मिलकर जांच शुरू की और 16 मई की दोपहर से तीन राज्यों में एक साथ छापेमारी शुरू की गई।
तीन राज्यों में एक साथ कार्रवाई
राजस्थान और तेलंगाना में टीमें भेजी गईं, जबकि असम के धुबड़ी और मोरीगांव जिलों में STF ने खुद मोर्चा संभाला। इन छापों में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया:
- सद्दीक (47) – बेला, भरतपुर (राजस्थान)
- आरिफ खान (20) – सहोरी, अलवर (राजस्थान)
- साजिद (21) – सहोरी, अलवर (राजस्थान)
- अकीक (25) – रोज़की, भरतपुर (राजस्थान)
- अरसद खान (34) – पेंडका, भरतपुर (राजस्थान)
- मोफिजुल इस्लाम (19) – कथलडी, धुबड़ी (असम)
- जकरिया अहमद (24) – सगुनमारी, धुबड़ी (असम)
सिम कार्ड का गलत इस्तेमाल
DGP सिंह के मुताबिक, बरामद सिम कार्ड सिर्फ साइबर क्राइम में ही नहीं, बल्कि राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में भी इस्तेमाल हो रहे थे। ये सिम व्हाट्सएप पर भारत के नंबर के तौर पर दिखाए जा रहे थे, जबकि इन्हें देश विरोधी ताकतें ऑपरेट कर रही थीं।
STF ने अब तक 948 सिम कार्ड और कई तकनीकी डिवाइस जब्त किए हैं। इसके अलावा 14 और लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।
मामला दर्ज, जांच जारी
इस मामले में 14 मई को केस दर्ज किया गया है। धाराएं हैं – BNS की 61(2)/147/148/62, UA(P) एक्ट की धारा 18, और IT एक्ट की धारा 66। जांच अभी भी चल रही है और जल्द और गिरफ्तारी हो सकती है।
ये ऑपरेशन दिखाता है कि देश की डिजिटल पहचान और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कितनी गंभीर चुनौतियां सामने हैं। STF की ये कार्रवाई एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।