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दिल्ली का क्रूरतम प्रेम कांड: दिल्ली की खामोशी में दहशत की गूंज

दिल्ली के संजय वन में मेघा जैन की नृशंस हत्या ने प्यार की आड़ में पनपती हिंसा और युवाओं की कुंठित मानसिकता को उजागर कर दिया।

दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में 19 वर्षीय मेघा जैन (परिवार द्वारा महक भी कही जाने वाली) का जीवन एक ऐसे व्यक्ति के हाथों समाप्त हो गया, जिसे वह कभी अपना प्रेमी मानती थी। 1 जून की वह दोपहर जब मेघा घर से कॉलेज जाने निकली, किसी को अनुमान नहीं था कि उसकी अधजली लाश अगले दिन संजय वन की झाड़ियों से बरामद होगी। पुलिस ने 24 घंटे के भीतर आरोपी 18 वर्षीय अर्शकीरत सिंह को गिरफ्तार कर लिया, जिसने स्वीकार किया कि उसने न सिर्फ मेघा का गला घोंटकर हत्या की, बल्कि चाकू से उसके शरीर को छलनी करने के बाद पेट्रोल छिड़ककर शव जलाने की कोशिश भी की।

गला घोंटा, चाकू बोया, फिर आग लगाई 

संजय वन के उस सुनसान कोने में जहाँ पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देती थी, 1 जून को एक नृशंस दृश्य ने जन्म लिया। अर्शकीरत ने पूर्वनियोजित तरीके से मेघा को वन के अंदर एक झाड़ीदार इलाके में ले जाया। पुलिस जाँच के अनुसार, उसने पहले मेघा का गला दबाकर उसे बेहोश किया। जब वह जमीन पर अचेत पड़ी थी, तब उसने अपनी जेब से चाकू निकाला और उसके पेट, छाती व पीठ पर एक के बाद एक करके 17 वार किए। फिर उसने पहले से तैयार पेट्रोल की बोतल निकाली और मेघा के शरीर पर उड़ेल दिया। माचिस की तीली से आग लगाते समय अर्शकीरत के हाथ भी जल गए, जिसके निशान बाद में पुलिस के लिए सबूत बने।  

फॉरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार, शव के जलने से पहले ही मेघा की मौत गला घोंटे जाने और आंतरिक अंगों में चाकू घुसने से हो गई थी। जलने के निशान मुख्यतः चेहरे, सिर और बालों पर थे, जो बताता है कि आरोपी ने विशेष रूप से उसकी पहचान मिटाने की कोशिश की थी। हत्या के बाद अर्शकीरत घटनास्थल से भाग निकला, लेकिन उसकी लापरवाही के कारण पेट्रोल की बोतल और खून से सने कपड़े वहीं छूट गए।  

परिवारों के बीच तनाव: धमकियों से लेकर झूठी कहानी तक 

मेघा और अर्शकीरत दोनों दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के छात्र थे। मेघा बीए प्रथम वर्ष में अंग्रेजी ऑनर्स और कोरियन भाषा की पढ़ाई कर रही थी, जबकि अर्शकीरत बीकॉम का छात्र था। दोनों करीब एक साल से एक-दूसरे को जानते थे, लेकिन पिछले तीन महीनों से मेघा का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। मेघा के पिता रमेश जैन के अनुसार, अर्शकीरत लगातार हमारे घर आकर हंगामा करता था। वह मेघा की कोचिंग सेंटर तक पहुँच जाता था और उसे धमकाता था कि अगर उसने दूसरों से बात की तो वह उसे मार डालेगा।

परिवार ने कई बार अर्शकीरत को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। धमकियाँ इतनी बढ़ गईं कि मेघा के मोबाइल में उसके भेजे गए आत्महत्या की धमकी भरे मैसेज मिले। 1 जून को जब मेघा लौटी नहीं, तो शाम को अर्शकीरत के पिता का फोन आया। उन्होंने झूठ बोला कि मेघा ने अर्शकीरत पर चाकू से हमला कर दिया है और वह पीतमपुरा के अस्पताल में भर्ती है। यही फोन पुलिस की जाँच का पहला सुराग बना, क्योंकि मेघा के परिवार को इस कहानी पर संदेह हुआ।  

पुलिस जाँच: सीसीटीवी, झूठे बयान और कड़वा सच  

महरौली पुलिस ने जब मेघा के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की, तो उन्हें सबसे पहले अर्शकीरत के पिता के झूठे दावे पर शक हुआ। पीतमपुरा के अस्पताल में कोई घायल भर्ती नहीं था। पुलिस ने तुरंत 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। कैमरों ने खुलासा किया कि मेघा और अर्शकीरत साथ में संजय वन की ओर जाते दिखे।  

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2 जून की सुबह, अर्शकीरत को पुलिस ने उसके रानी बाग स्थित घर से पकड़ा। डीसीपी दक्षिणी जिला अंकित चौहान के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने झूठ बोलने की कई बार कोशिश की, लेकिन जब हमने सीसीटीवी सबूत दिखाए तो उसने कबूल कर लिया। अर्शकीरत ने न सिर्फ हत्या स्वीकारी, बल्कि शव का स्थान भी बताया। संजय वन में चलाए गए सर्च ऑपरेशन में झाड़ियों के पीछे अधजला शव मिला, जिसके पास ही पेट्रोल की खाली बोतल और खून से सना रुमाल पड़ा था।  

समाज का सवाल: सुरक्षा का भ्रम और कुंठित प्रेम का जहर  

इस घटना ने संजय वन के आसपास रहने वाले निवासियों को हिलाकर रख दिया। दलबीर सिंह, जो रोजाना यहाँ सैर के लिए आते हैं, कहते हैं: इस पार्क में सुरक्षा गार्ड हमेशा मौजूद रहते हैं। हमने कभी नहीं सोचा था कि यहाँ ऐसी भयावह घटना घट सकती है। घटना के बाद नगर निगम ने पार्क में अतिरिक्त स्ट्रीट लाइट्स और 10 नए सुरक्षा गार्ड तैनात करने का निर्णय लिया है।  

मनोवैज्ञानिक डॉ. रचना शर्मा के अनुसार, यह मामला कुंठित प्रेम की खतरनाक मानसिकता को दिखाता है। अर्शकीरत का मेघा पर अधिकार का भाव और उसके जीवन पर नियंत्रण की इच्छा ही इस हिंसा का मूल कारण थी। दिल्ली महिला आयोग ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए पुलिस से जाँच रिपोर्ट मांगी है।  

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रीतु कुमारी OBC Awaaz की एक उत्साही लेखिका हैं, जिन्होंने अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई बीजेएमसी (BJMC), JIMS इंजीनियरिंग मैनेजमेंट एंड टेक्निकल कैंपस ग्रेटर नोएडा से पूरी की है। वे समसामयिक समाचारों पर आधारित कहानियाँ और रिपोर्ट लिखने में विशेष रुचि रखती हैं। सामाजिक मुद्दों को आम लोगों की आवाज़ बनाकर प्रस्तुत करना उनका उद्देश्य है। लेखन के अलावा रीतु को फोटोग्राफी का शौक है, और वे एक अच्छी फोटोग्राफर बनने का सपना भी देखती है। रीतु अपने कैमरे के ज़रिए समाज के अनदेखे पहलुओं को उजागर करना चाहती है।

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