लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का हालिया मैच फिक्सिंग वाला बयान अब विवादों में घिर गया है। जहां एक तरफ उन्होंने पार्टी के निष्क्रिय नेताओं पर घोड़े की उपमाओं के ज़रिए निशाना साधा, वहीं चुनाव आयोग ने उनके मैच फिक्सिंग के आरोप को पूरी तरह निराधार और लोकतंत्र को बदनाम करने वाला बताया है।
रेस का घोड़ा बनाम शादी का घोड़ा: राहुल का तंज
मध्य प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, हमें पार्टी में अब रेस के घोड़े चाहिए, शादी के घोड़े नहीं। उन्होंने समझाया कि रेस का घोड़ा वो नेता होता है जो जमीन पर मेहनत करता है, जबकि शादी का घोड़ा सिर्फ कैमरे और प्रचार में नजर आता है।
लंगड़ा घोड़ा और रिटायरमेंट रैंच का जिक्र
राहुल ने आगे कहा कि कुछ नेता ऐसे हैं जो न चुनाव लड़ते हैं, न रैलियों में दिखते हैं, बस पार्टी में टिके रहते हैं। अब उन्हें रिटायरमेंट रैंच भेजने का वक्त आ गया है।
मध्य प्रदेश पर नजर, जिला अध्यक्षों को अहम भूमिका
राहुल के इस बयान को कांग्रेस की मध्य प्रदेश रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां पार्टी लगातार हार झेल रही है। उनका साफ इशारा था कि अब टिकट मेहनत करने वालों को मिलेगा, न कि सिर्फ पुराने नामों को।
कांग्रेस का सफर: 2009 से 2024 तक गिरावट
2009 में कांग्रेस ने 206 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, वहीं 2024 में पार्टी सिर्फ 99 सीटों पर सिमट गई। वोट शेयर भी गिरकर 22% रह गया। इस दौरान कई बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं, जैसे ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुनील जाखड़ और हार्दिक पटेल।
चुनाव आयोग ने राहुल के आरोप को किया खारिज
राहुल गांधी के मैच फिक्सिंग वाले बयान पर चुनाव आयोग ने कड़ा ऐतराज जताया है। आयोग ने इसे पूरी तरह से आधारहीन और लोकतंत्र को ठेस पहुंचाने वाला बताया है। आयोग ने कहा कि ऐसे बयान बिना किसी सबूत के लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करते हैं, जो अस्वीकार्य है।