लोग पूछ रहे हैं कि यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को कॉन्फिडेंशियल जानकारी आखिर मिलती कहां से थी? इसका जवाब सिर्फ उनके जासूसी आरोपों में नहीं, बल्कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की आज की पहुंच में छुपा है।
दरअसल, आजकल देश के बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को ऐसा एक्सेस मिल जाता है, जो आम रिपोर्टर्स के पास नहीं होता। VIP इवेंट्स में जहां पत्रकार 100 मीटर दूर खड़े दिखते हैं, वहीं इन्फ्लुएंसर VIP के एकदम करीब होते हैं। महाकुंभ जैसे आयोजनों में भी यही नज़ारा दिखा, इन्फ्लुएंसर्स ड्रोन से शूट कर रहे थे, जबकि मीडिया हाउस को इसकी इजाजत तक नहीं थी।
अब सरकार खुद इन्फ्लुएंसर्स को कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार का जिम्मा देती है। उन्हें reels बनाने, शूटिंग करने और कंटेंट तैयार करने के अधिकार मिलते हैं। ऐसे में जो जितना करीब होता है, वही सबसे ज्यादा जानकारी रखता है।
ज्योति मल्होत्रा भी कई सरकारी इवेंट्स में सक्रिय थीं, चाहे वो वंदे भारत ट्रेन का उद्घाटन हो या कोई और आयोजन। उनकी पहुंच हाई-लेवल कार्यक्रमों तक थी। इसके अलावा, जो सबसे चौंकाने वाली बात है, वो ये कि उन्हें दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास तक डायरेक्ट एक्सेस मिला हुआ था। रिपोर्ट्स के अनुसार, वहां तैनात पाकिस्तानी अधिकारी दानिश से उनके निजी संबंध थे।
तो सवाल ये नहीं कि ज्योति को जानकारी कहां से मिलती थी, बल्कि असली सवाल ये है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की आड़ में कितनी खुफिया पहुंच मिल सकती है, और क्या इस पूरे सिस्टम को लेकर कहीं कोई गड़बड़ी है?