मुंबई: मराठा समाज के कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने 10% ओबीसी कोटे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया है। उन्होंने सरकार को आगाह किया कि मराठा समाज की सहनशीलता की परीक्षा न लें। जरांगे ने यह भी कहा है कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है, वे केवल आरक्षण की मांग कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि आज़ाद मैदान में प्रदर्शन कर रहे लोगों के लिए भोजन, पानी और सार्वजनिक सुविधाओं की कमी है, जिससे नाराजगी और बढ़ गई है। मनोज जरांगे ने कहा, “हम सिर्फ क्वनबी कैटेगरी के तहत पात्रता के आधार पर अपना हक़ मांग रहे हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि मराठा समाज की मांग केवल आरक्षण तक सीमित है और उनका राजनीति से कोई संबंध नहीं है।
जरांगे ने यह भी साफ किया कि वे मौजूदा ओबीसी कोटे में कटौती नहीं चाहते हैं और प्रशासन पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हम ओबीसी कोटा घटाने की मांग नहीं कर रहे हैं। अफवाहें न फैलाएं।”
उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की कि गरीब मराठाओं का अपमान न करें और आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राज्य का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “बीएमसी ने प्रशासनिक दबाव में आकर आंदोलनकारियों के लिए खाना और पानी बंद कर दिया है। सार्वजनिक शौचालय और होटल भी बंद कर दिए गए हैं। हम यह सब नहीं भूलेंगे। देखते हैं आप हमें कितने दिन तक परेशान कर सकते हैं।”
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, उन्हें बुनियादी सुविधाएं न मिलने के कारण गुस्सा और बढ़ गया है, फिर भी वे अपनी मांग पर डटे हैं।
News Source: PTI