वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह की यह तीसरी किताब है, जिसका शीर्षक है, ईवीएम वाशिंग मशीन में धुली, यह किताब पूरी तरह ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर आधारित है। किताब पूरी तरह से रिसर्च पर टिकी है और सिर्फ सवाल खड़े नहीं करती, बल्कि चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के सुझाव भी देती है।
क्यों है यह किताब खास?
ईवीएम की कहानी दरअसल नरेन्द्र मोदी की किताबों वाली राजनीति की भी कहानी है। शुरुआत में इसे खराब बताया गया, कहा गया कि इससे चुनाव कराना संभव ही नहीं। एक मशीन जो बीजेपी के विपक्ष में रहते संदिग्ध थी और सत्ता में आते ही “लाड़ली बहना” हो गई उसकी कहानी है। इस किताब में विस्तार से बताया गया है कि कैसे बीजेपी ने पहले ईवीएम पर सवाल उठाए और आज वही पार्टी इसका सबसे बड़ा समर्थन करती है।

पिछली किताबों से जुड़ाव:
इस किताब में बताया गया है कि कैसे एक समय में बीजेपी खुद EVM को असंवैधानिक और छेड़छाड़ योग्य कह रही थी। किताब 2010 में आई दो चर्चित पुस्तकों का भी उल्लेख करती है:
- इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन्स : अनकांस्टीट्यूशनल एंड टैम्परेबल – सुब्रमण्यम स्वामी और एस कल्याणरमण
- डेमोक्रेसी ऐट रिस्क! कैन वी ट्रस्ट आवर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन्स? – जीवीएल नरसिम्हा राव
आज वही पार्टी इन मशीनों का सबसे बड़ा बचाव कर रही है।
सत्ता में आने के बाद बीजेपी का EVM पर यू-टर्न
ईवीएम जब आई थी तो भाजपा सत्ता में नहीं थी पर सत्ता में आने के बाद भाजपा ने यू-टर्न लिया और उसका समर्थन करने लगी। अब यह वाशिंग मशीन में धुल चुकी है। इतनी कि इसमें कोई बुराई नहीं है। कोई सुनवाई नहीं है। पहले न सिर्फ किताबें थीं वीडियो थे, तकनीकी जानकार थे। सब अब भी हैं। पर ईवीएम धुल गई। उसी की कहानी है यह किताब।
क्यों पढ़नी चाहिए ये किताब?
यह किताब सिर्फ तकनीकी या राजनीतिक चर्चा नहीं करती, बल्कि भाजपा के चाल, चरित्र और चेहरे में आए बदलाव को सामने लाती है। 300 रुपये की इस किताब में आपको भरपूर मनोरंजन और याद दिलाने वाली कहानियाँ मिलेंगी।

अन्य किताबों का ज़िक्र भी
संजया कुमार सिंह ने इस किताब में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला की किताब “एवरी वोट काउंट्स: द स्टोरी ऑफ इंडियाज़ इलेक्शन” के उस अध्याय का भी ज़िक्र किया है जो कहता है, दि ईवीएम : अ कंट्रोवर्सी दैट रिफ्यूजेज टू डाई (ईवीएम : एक विवाद जो खत्म होने का नाम नहीं लेता)। एसवाई कुरैशी पर निशिकांत दुबे के आरोपों को जानने के बाद अंग्रेजी की इन किताबों और ईवीएम का पूरा मामला हिन्दी में समझने के लिए इससे बेहतर कोई तरीका नहीं हो सकता है।”।
किताब में दिए गए हैं 15 ठोस कारण
पुस्तक की प्रस्तावना और भूमिका से पहले ईवीएम का मामला क्यों गंभीर में 15 बिन्दु हैं और विस्तार से बताया गया है कि इस किताब की जरूरत क्यों है। किताब पढ़कर आप जान सकेंगे कि ईवीएम हैक करके दिखाने की चुनाव आयोग की चुनौती क्या थी और कोई क्यों नहीं आगे आया। पूरे मामले में सबसे दिलचस्प यह तथ्य है कि भाजपा ही इसे पहले असंवैधानिक और छेड़छाड़ योग्य बता रही थी और अब इसका बचाव करती है।
किताब के बारे में संजय कुमार सिंह को सुनना चाहें तो देखें:
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मंगा लीजिए, बहुत कुछ जानने को मिलेगा।