अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत में भूचाल ला दिया है। उन्होंने भारत, चीन, यूरोपीय संघ सहित कई देशों पर भारी आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
ट्रंप द्वारा जारी ‘Reciprocal Tariffs Chart’ के अनुसार, अमेरिका में आयात होने वाले लगभग सभी उत्पादों पर न्यूनतम 10% का शुल्क लगाया जाएगा, जबकि कुछ देशों के लिए यह दर 50% तक पहुंच सकती है। खासतौर पर कंबोडिया, वियतनाम, श्रीलंका और मेडागास्कर जैसे देशों पर अभूतपूर्व ऊंचे शुल्क थोपे गए हैं, जिससे व्यापारिक संबंधों में नए तनाव उत्पन्न होने की आशंका है।
व्हाइट हाउस से ट्रंप का ऐलान: “अब अमेरिका सबसे पहले”
व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में दिए गए अपने भाषण में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह कदम अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उद्योगों की रक्षा के लिए जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब अमेरिका को अपने व्यापारिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने अपने भाषण में यह भी कहा कि अमेरिका दशकों से अन्य देशों को आर्थिक मदद देता आ रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि ये देश अपने व्यापारिक हितों की रक्षा खुद करें।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि कई मित्र देश, व्यापार के मामले में विरोधियों से भी अधिक नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। उन्होंने मैक्सिको और कनाडा का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका इन देशों की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने में मदद करता रहा है, लेकिन अब इन देशों को खुद अपने व्यापारिक संतुलन का ध्यान रखना होगा।
टैरिफ की मार: कौन से देश होंगे सबसे ज्यादा प्रभावित
नए शुल्कों की सूची में शामिल देशों को विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें से कुछ को बहुत अधिक टैरिफ झेलना पड़ेगा, जबकि कुछ देशों पर अपेक्षाकृत हल्का कर लगाया गया है।
सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में कंबोडिया को 49% टैरिफ झेलना पड़ेगा, जबकि लाओस पर 48% और मेडागास्कर पर 47% टैरिफ लगाया गया है। वियतनाम को 46%, म्यांमार और श्रीलंका को 44% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।
भारत पर 26%, चीन पर 34% और यूरोपीय संघ पर 20% का टैरिफ लगाया गया है। जापान को 24%, दक्षिण कोरिया को 25% और स्विट्जरलैंड को 31% टैरिफ देना होगा।
ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चिली, तुर्की, यूएई और इजरायल जैसे देशों पर अपेक्षाकृत कम 10% का टैरिफ लगाया गया है। नॉर्वे पर 15%, बांग्लादेश पर 37%, पाकिस्तान पर 29% और थाईलैंड पर 36% का टैरिफ लागू किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन शुल्कों का असर इन देशों के निर्यात और उनकी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कई विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था अमेरिका में होने वाले निर्यात पर निर्भर करती है, और ऐसे में ट्रंप द्वारा घोषित यह टैरिफ नीति कई देशों के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है।
क्या अमेरिका को इससे फायदा होगा?
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस कदम से अमेरिकी कंपनियों को अधिक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम होगी। ट्रंप ने दावा किया कि इससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह रणनीति अमेरिका के लिए उतनी फायदेमंद नहीं हो सकती जितनी ट्रंप उम्मीद कर रहे हैं। कई देशों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, और यदि ये देश जवाबी टैरिफ लगाते हैं तो अमेरिकी कंपनियों को भी नुकसान उठाना पड़ेगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह नीति एक नए व्यापार युद्ध की शुरुआत हो सकती है। कई देशों ने संकेत दिया है कि वे अमेरिका पर जवाबी कर (Retaliatory Tariffs) लगा सकते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार अस्थिर हो सकता है।
विशेष रूप से, यूरोपीय संघ और चीन पहले ही ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर असहमति जता चुके हैं और कड़े कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
क्या यह अमेरिका के लिए फायदेमंद होगा, या वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचाएगा?
अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी इस फैसले का असर पड़ने की आशंका है। कई बड़े अमेरिकी उद्योग जिनका उत्पादन विदेशी कच्चे माल पर निर्भर करता है, उन्हें अब बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ेगा। इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं पर भी आर्थिक दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि उच्च टैरिफ के कारण रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी होगी।
ट्रंप का यह फैसला केवल अमेरिकी बाजारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ेगा। कई देशों की अर्थव्यवस्था इस टैरिफ नीति से प्रभावित होगी, और यह भी संभव है कि कुछ देश अमेरिका को अपने निर्यात को कम कर दें, जिससे अमेरिकी बाजार में उत्पादों की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक लाभदायक साबित हो सकता है, लेकिन अल्पकालिक तौर पर इससे कई व्यापारिक रिश्तों में दरार आ सकती है।
क्या यह अमेरिका के लिए सही फैसला है या वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाला कदम?
यह सवाल अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के बीच बहस का विषय बन चुका है। क्या अमेरिका वास्तव में इस नीति से लाभान्वित होगा, या यह फैसला वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को बढ़ावा देगा?